क्रिया Verb

  1. माँ पिता जी को समझा रही हैं ।
  2. कार चल रही है । 
  3. सोहन विद्यार्थियों को पढ़ा रहा है । 

उपर्युक्त वाक्यों में कुछ – न – कुछ कार्य हो रहा है । इन कार्यों का पता इन वाक्यों में आए . शब्दों से चल रहा है । ये शब्द हैं – समझा रही हैं , चल रही है , पढ़ा रहा है , ऐसे शब्द क्रिया कहलाते हैं । 

क्रिया एक विकारी शब्द है । अत : लिंग , वचन और कारक क्रिया की रूप – रचना पर प्रभाव डालते हैं , अर्थात् इनके कारण क्रिया शब्दों में विकार ( परिवर्तन ) आ जाता है । 

प्रत्येक वाक्य में क्रिया का होना आवश्यक होता है । हिंदी में क्रिया वाक्य के अंत में आती है । कुछ वाक्यों में एक से अधिक क्रियाएँ भी होती हैं । 

माता ने पूछा- “ इतनी देर तक कहाँ थे ? “

                   ” सिद्धार्थ के घर । ” 

दूसरे वाक्य में क्रिया नहीं है । फिर भी यह वाक्य पूर्ण है । वाक्य में कई बार क्रिया लुप्त रहती है । यह वाक्य इस प्रकार पूर्ण होगा — ‘ सिद्धार्थ के घर था ।

धातु ( Root )

क्रिया का मूल रूप – प्रत्येक क्रिया का मूल रूप होता है । इसे धातु कहते हैं । लिंग , काल और अवस्था से इसका रूप बदलता है । मूल रूप के साथ ‘ ना ‘ लगाकर नया शब्द बनाया जाता है । जाग , उठ , बैठ , पढ़ , लिख , हँस आदि क्रिया के मूल रूप हैं । इनके साथ ‘ ना ‘ लगाने पर इनके रूप निम्नलिखित होंगे

जाग + ना = जागना

पढ़+ ना = पढ़ना

उठ + ना = उठना

लिख + ना = लिखना

बैठ + ना = बैठना

हँस + ना = हँसना

क्रिया के भेद ( Kinds of Verb )
( क ) कर्म के आधार पर क्रिया के भेद ( Verb Based on Function )

कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद हैं 

  1. सकर्मक क्रिया ( Transitive Verb ) 2. अकर्मक क्रिया ( Intransitive Verb ) 

( 1 ) सकर्मक क्रिया ( Transitive Verb ) – जिन क्रियाओं का कर्म होता है और क्रिया का फल कर्म पर पड़ता है , उन्हें सकर्मक क्रिया कहते हैं ।

 ( क ) आँचल टेलीविजन देख रही है । 

 ( ख ) महेंद्र पुस्तक पढ़ता है । 

इन वाक्यों में टेलीविजन और पुस्तक कर्म हैं । इन क्रियाओं का फल आँचल और महेंद्र पर न पड़कर टेलीविजन और पुस्तक पर पड़ रहा है , इसलिए ये सकर्मक क्रियाएँ हैं । 

क्रिया के साथ क्या , किस , किसको प्रश्न करने पर यदि उत्तर मिल जाता है तो क्रिया सकर्मक होती है ।

सकर्मक क्रिया के भेद – सकर्मक क्रिया प्रायः दो प्रकार की होती है 

( क ) एककर्मक क्रिया ( Single Object Verb ) 

( ख ) द्विकर्मक क्रिया ( Verb with Two objects )

( क ) एककर्मक क्रिया ( Single Object Verb ) – जिन क्रियाओं का एक कर्म होता है , वे एककर्मक क्रिया कहलाती है ।

 ( 1 ) रेशमा पेन से लिखती है । ( i ) रेखा झाडू से सफाई करती है । 

इन वाक्यों में ‘ पेन ‘ , ‘ झाडू ‘ कर्म हैं ।

( ख ) द्विकर्मक क्रिया ( Verb with Two Objects ) – जिन क्रियाओं के दो कर्म होते हैं , उन्हें द्विकर्मक क्रिया कहते हैं ।

( i ) माँ बेटी को रोटी बनाना सिखाती है । ( ii ) अध्यापक विद्यार्थियों को कविता पढ़ाता है । 

इन वाक्यों में बेटी , रोटी तथा विद्यार्थियों , कविता कर्म हैं । प्रत्येक क्रिया के दो कर्म होने के कारण ये द्विकर्मक क्रियाएँ हैं । 

( 2 ) अकर्मक क्रिया ( Intransitive verb ) – जिन क्रियाओं का कर्म नहीं होता तथा क्रिया का फल कर्ता पर पड़ता हो , वे क्रियाएँ अकर्मक क्रिया कहलाती हैं । 

( i ) राधा गा रही है । ( ii ) सुभाष जाता है । 

इन वाक्यों में ‘ गा ‘ तथा ‘ जाता ‘ अकर्मक क्रियाएँ हैं ।

( ख ) प्रयोग और संरचना के आधार पर क्रिया के भेद ( Verb Based on Formation and its use )

प्रयोग और संरचना की दृष्टि से क्रिया के छह भेद होते हैं 

  1. सामान्य क्रिया ( Simple Verb ) 
  2. संयुक्त क्रिया ( Compound Verb ) 
  3. नामधातु क्रिया ( Nominal Verb ) 
  4. प्रेरणार्थक क्रिया ( Causative verb ) 
  5. पूर्वकालिक क्रिया ( Gerundive Verb ) 
  6. कृदंत क्रिया ( Suffix – ending Verb ) 

( 1 ) सामान्य क्रिया ( Simple Verb ) – किसी वाक्य में एक ही क्रिया हो तो उसे सामान्य क्रिया कहते हैं ; जैसे 

( क ) रमेश गया ।

( ख ) रीटा जागी । 

( ग ) विशाल नहाया ।

( घ ) अनुपमा भागी ।

 ( 2 ) संयुक्त क्रिया ( Compound Verb )

( क ) माता जी कार्यालय से लौट आईं । 

( ख ) शीतल ने भोजन कर लिया । 

( ग ) रेलगाड़ी चल पड़ी ।

( घ ) घंटी बज गई ।

इन वाक्यों में एक से अधिक क्रियाएँ प्रयोग की गई हैं । वाक्य ( क ) में लौट ( लौटना ) तथा आई ( आना ) क्रियाएँ हैं । वाक्य ( ख ) में कर ( करना ) तथा लिया ( लेना ) क्रियाएँ हैं । वाक्य ( ग ) में चल ( चलना ) तथा पड़ी ( पड़ना ) क्रियाएँ हैं । वाक्य ( घ ) में बज ( बजना ) और गई क्रियाएँ हैं । 

इन सभी वाक्यों में एक से अधिक क्रियाएँ हैं , इसलिए इन्हें संयुक्त क्रियाएँ कहते हैं ।

जिन वाक्यों में संयुक्त क्रियाएँ होती हैं , उनमें पहली क्रिया मुख्य – क्रिया होती है । शेष क्रियाएँ मुख्य – क्रिया की सहायक होती हैं । मुख्य – क्रिया के साथ आने वाली अन्य क्रियाएँ रंजक क्रियाएँ कहलाती है । 

( 3 ) नामधातु क्रिया ( Nominal Verb ) 

( क ) बच्चों को हर समय फटकारना नहीं चाहिए ।

( ख ) तारों का टिमटिमाना मन मोह लेता है । 

इन वाक्यों में फटकार संज्ञा शब्द से फटकारना क्रिया बनी है । टिमटिमाना क्रिया अनुकरणवाची शब्द टिमटिम से बनी है । ऐसी  क्रियाएँ नामधातु क्रियाएँ कहलाती हैं ।

संज्ञा , सर्वनाम , विशेषण आदि शब्दों से बनने वाली क्रियाएँ , नामधातु क्रियाएँ कहलाती हैं ; जैसे – रंगना , लजाना , चकराना , अपनाना , दोहराना , थरथराना , खटखटाना आदि । 

( 4 ) प्रेरणार्थक क्रिया ( Causative verb ) 

( क ) अनूप अंजना को चित्र दिखाता है । 

( ख ) ऋतेश ने नौकर से कार्यालय खुलवाया

( ग ) मीनाक्षी ने पुत्र को दलिया खिलाया । 

( घ ) विश्वनाथ पूनम को पढ़ाता है । 

इन वाक्यों में दिखाता , खुलवाया , खिलाया , पढ़ाता क्रियाएँ हैं । ये क्रियाएँ अंजना , नौकर , पुत्र और पूनम के द्वारा हो रही हैं , परंतु इन क्रियाओं को करने की प्रेरणा अनूप , ऋतेश , मीनाक्षी और विश्वनाथ दे रहे हैं । ऐसी क्रियाएँ प्रेरणार्थक क्रियाएँ कहलाती हैं ।

( 5 ) पूर्वकालिक क्रिया ( Gerundive Verb ) 

( क ) वंदना ने कविता पढ़कर सुनाई । ( ख ) रेखा सबसे मिलकर अमरावती गई । 

वाक्यों में दो – दो क्रियाएँ हैं । वाक्य ( क ) में पढ़कर और सुनाई तथा वाक्य ( ख ) में मिलकर और गई क्रियाएँ हैं । जो क्रिया पहले होती हैं , उसे पूर्वकालिक क्रिया कहते हैं । ‘ पढ़कर ‘ तथा ‘ मिलकर ‘ पूर्वकालिक क्रियाएँ हैं , क्योंकि ये पहले हुई हैं । 

मूलधातु के साथ ‘ कर ‘ अथवा ‘ करके ‘ प्रयोग करके पूर्वकालिक क्रिया बनती है । 

( 6 ) कृदंत क्रिया ( Suffix – ending Verb ) – चल , लिख , पढ़ आदि मूलधातु हैं । इनके साथ ता , ना , कर आदि प्रत्यय लगाकर क्रिया बनाते हैं । ऐसी क्रियाएँ कृदंत क्रियाएँ कहलाती हैं । 

जो क्रियाएँ , क्रिया शब्दों के अंत में प्रत्यय ( Suffix ) लगाकर बनती हैं , उन्हें कृदंत क्रियाएँ कहते हैं ; जैसे 

चल + ना = चलना

चल + कर = चलकर

लिख + ता = लिखता

चल + ता= चलता

लिख + ना = लिखना

लिख + कर = लिखकर

चलना , चलता , चलकर , लिखना , लिखता , लिखकर कृदंत क्रियाएँ हैं । 

पूरक ( Complement ) 

कुछ वाक्यों में है , हैं , हूँ , हो , था , थी , थे , थीं का प्रयोग पूर्ण क्रिया के रूप में होता है । फिर इनके साथ कोई अन्य क्रिया नहीं आती । ऐसी स्थिति में वाक्यों के अर्थ को पूरा करने के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है , उन्हें पूरक कहते हैं । यदि वाक्य से पूरक को हटा दिया जाए तो वाक्य का अर्थ पूरा नहीं होगा ।

निम्नलिखित वाक्यों में रंगीन शब्द पूरक हैं 

मैं अध्यापक हूँ।
गीता की बड़ी बहन नर्स है।
रमा घर में थी।
दशरथ अयोध्या के राजा थे।

वे डॉक्टर है।
तुम ईमानदार नहीं हो।
वह किसान था।
सभी महिलाये प्रसन्न थी।

सहायक क्रिया ( Helping Verb )

वाक्य में जो शब्द मुख्य क्रिया की सहायता करते हैं , उन्हें सहायक क्रिया कहते हैं ; जैसे 

वह प्रातःकाल घूमने जाता है ।

मैं कभी झूठ नहीं बोलती हूँ । 

तुम विद्यालय कब जाते हो ? 

वे इस विद्यालय में पढ़ते हैं ।

वे लोग इस मकान में रहते थे । 

उपर्युक्त वाक्यों में घूमने जाता ‘ , ‘ बोलती ‘ , ‘ जाते ‘ , ‘ पढ़ते ‘ और ‘ रहते ‘ मुख्य क्रियाएँ हैं तथा है ‘ , हूँ ‘ , ‘ हो ‘ , हैं ‘ थे ‘ इनकी सहायता कर रही है ; अत : ये सहायक क्रियाएँ हैं ।