लक्षणा शब्द शक्ति की परिभाषा, भेद एवं उदाहरण | Lakshana Shabd Shakti Kise Kahate Hain

इस आर्टिकल में हम लक्षणा शब्द शक्ति किसे कहते हैं, के भेद/प्रकार और उनके प्रकारों को उदाहरण के माध्यम से पढ़ेंगे।इस टॉपिक से सभी परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाते है।  हम यहां पर लक्षणा शब्द शक्ति के सभी भेदों/प्रकार के बारे में सम्पूर्ण जानकारी लेके आए है। Hindi में लक्षणा शब्द शक्ति से संबंधित बहुत सारे प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं और राज्य एवं केंद्र स्तरीय बोर्ड की सभी परीक्षाओं में यहां से questions पूछे जाते है। लक्षणा शब्द शक्ति इन हिंदी के बारे में उदाहरणों सहित इस पोस्ट में सम्पूर्ण जानकारी दी गई है।  तो चलिए शुरू करते है –

लक्षणा शब्द शक्ति किसे कहते कहते हैं | Lakshana Shabd Shakti Kise Kahate Hain

जब वक्ता द्वारा कहे गये शब्द के मुख्य अर्थ से मूल अर्थ ना निकले, परन्तु मुख्य अर्थ से सम्बंधित किसी एक लक्षण के आधार पर कोई अन्य अर्थ निकले, यह अन्य अर्थ देने वाली शब्द शक्ति, लक्षणा शब्द शक्ति कहलाती है । 

लक्षणा शब्द शक्ति की परिभाषा |  Lakshana Shabd Shakti ki Paribhasha

लक्षणा शब्द शक्ति की परिभाषा – जब किसी वक्ता द्वारा कहे गये शब्द के मुख्य अर्थ या वाच्यार्थ के अभीष्ट अर्थ का बोध ना हो अर्थात शब्द के मुख्य अर्थ में बाधा हो तब किसी रूढ़ि या प्रयोजन के आधार पर मुख्यार्थ से सम्बंध रखने वाले अन्य अर्थ को लक्ष्य किया जाता है, वहाँ लक्षणा शब्द शक्ति होती है । 
अर्थात  – जब वक्ता द्वारा बोले गये शब्द वाच्यार्थ को स्वीकार न कर किसी अन्य अर्थ को ग्रहण किया जाता है , तब उसे लक्ष्यार्थ कहते है तथा लक्ष्यार्थ का बोध करवाने वाली शक्ति को लक्षणा शक्ति कहा जाता है । 

लक्षणा शब्द शक्ति के लिए निम्न तीन बातें आवश्यक है –  

1. शब्द के मुख्य अर्थ या वाच्यार्थ में बाधा होना ।
2.  मुख्यार्थ से सम्बंधित कोई अन्य अर्थ लिया जाना । 
3. उस शब्द के लक्ष्यार्थ को ग्रहण करने का कोई विशेष प्रयोजन होना । 

लक्षणा शब्द शक्ति के उदाहरण |  Lakshana Shabd Shakti ke Udaharan

✦ राम का दिल पत्थर है । 
✦ राम तो गधा है । 
✦ सीता तो गाय है । 

उपर्युक्त वाक्यों में ” राम का दिल पत्थर है ”  में पत्थर का मतलब कठोर है । अतः वाक्य का मतलब है – कठोर होना । 
इसी प्रकार ” राम तो गधा है ”  वाक्य में गधा का मतलब प्राणी न होकर मुर्ख है , अतः वाक्य का मतलब है – मूर्ख । 
इसी प्रकार ” सीता तो गाय है ” वाक्य में ” गाय ” का मतलब है – सीधा / भोला । 

लक्षणा शब्द शक्ति के भेद  | Lakshana Shabd Shakti ke Bhed

लक्षणा शब्द शक्ति के निम्न भेद होते है – 
1. रूढ़ा लक्षणा 
2. प्रयोजनवती लक्षणा 

रूढ़ा लक्षणा की परिभाषा

1. रूढ़ा लक्षणा  – जब किसी लोक व्यवहार की रूढ़ि ( परंपरा  ) ( मुहावरे – लोकोक्ति – कहावत आदि ) को आधार मानकर शब्द का प्रयोग लक्ष्यार्थ में  का किया जाता है , तो वह रूढ़ा लक्षणा कहलाती है ।  
अर्थात  , जब मुख्यार्थ में बाधा होने पर रूढ़ि के आधार पर लक्ष्यार्थ ग्रहण किया जाता है , तो वहाँ रुढ़ा लक्षणा होती है । 

रूढ़ा लक्षणा के उदाहरण

✦ पाकिस्तान हार गयी ।
✦ राम हरिशचंद्र है । 
✦ राम श्याम के आंखों का तारा है । 
✦ भारत जाग उठा ।
✦ पंजाब वीर है । 
उपर्युक्त वाक्यों में ” पाकिस्तान ” से आशय पाकिस्तान की क्रिकेट टीम से है ,  ” हरिशचंद्र ” से आशय सत्य बोलनेवाला , ” आंखों का तारा ” से आशय बहुत प्रिय होना , ” भारत ” से आशय भारतवासियों से तथा ” पंजाब ” से आशय पंजाब के निवासियों से है । 

प्रयोजनवती लक्षणा की परिभाषा

2. प्रयोजनवती लक्षणा –  जब किसी वक्ता के विशेष प्रयोजन से प्रेरित होकर शब्द का प्रयोग लक्ष्यार्थ में किया जाता है , तो वहाँ प्रयोजनवती लक्षणा मानी जाती है ।
अर्थात – जब मुख्यार्थ किसी विशेष प्रयोजन के कारण लक्ष्यार्थ का बोध करवाता है , वहाँ प्रयोजनवती लक्षणा होती है । 

प्रयोजनवती लक्षणा के उदाहरण

✦ बहुत सी तलवारें मैदान में आ गई । 
( उपर्युक्त वाक्य में तलवार का अर्थ तलवार न होकर तलवारबंद सिपाही लिया गया है , अतः यह अर्थ विशेष प्रयोजन के कारण लक्ष्यार्थ हुआ है । ) 

 ✦ मोहन तो गधा है ।
( उपर्युक्त वाक्य में गधा का अर्थ प्राणी न होकर मूर्ख के अर्थ में प्रयोग किया गया है , अतः विशेष अर्थ के लिए गधा , मूर्ख के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है 

प्रयोजनवती लक्षणा के भेद – 

  इसके मुख्यतः दो भेद होते है – 
1. गौणी प्रयोजनवती लक्षणा 
2. शुद्धा प्रयोजनवती लक्षणा 

गौणी प्रयोजनवती लक्षणा की परिभाषा

1. गौणी प्रयोजनवती लक्षणा  –  जहाँ सादृश्य के आधार पर अर्थात समान गुण या धर्म के कारण लक्ष्यार्थ का बोध होता है , वहाँ ” गौणी लक्षणा ” होती है । 

जैसे –
✦ राम शेर है ।
( वाक्य में शेर का अर्थ बहादुर , शक्तिशाली , पराक्रमी  से है ,अर्थात यहाँ गौणी लक्षणा है – राम शेर के समान शक्तिशाली है । ) 

✦ राधा तो एकदम  गाय है ।
( वाक्य में गाय का अर्थ सीधी , भोली आदि से है , यहाँ गौणी लक्षणा है – राधा गाय की तरह भोली है । ) 

शुद्धा प्रयोजनवती लक्षणा की परिभाषा

2. शुद्धा प्रयोजनवती लक्षणा  – जब सादृश्य सम्बंध के अतिरिक्त अन्य सम्बंध ( जैसे – समीपता, साहचर्य , आधार – आधेय , कार्य – कारण )  से लक्ष्यार्थ का बोध होता है , वहाँ शुद्धा लक्षणा होती है । 

जैसे – 
✦ लाल पगड़ी आ रही है ।
( वाक्य में लाल पगड़ी का अर्थ लाल रंग न होकर ,सिपाही है जो एक अन्य सम्बंध से लक्ष्यार्थ हुआ है , अतः यह शुद्धा लक्षणा है । ) 

शुद्धा लक्षणा के भेद  –  

शुद्धा लक्षणा के दो भेद होते है – 

1. उपादान लक्षणा  – जब लक्षणा से निकलने वाले अर्थ में वाच्यार्थ भी शामिल होता है , तो इसे उपादान लक्षणा कहते है ।अर्थात लक्ष्यार्थ में वाच्यार्थ भी एक उपादान अंग के रूप में सम्मिलित रहता है । 

जैसे –
✦ हाथ – पाँव बचाकर काम करना। 
( वाक्य में सभी अंगों को बचाकर काम करने की बात की है , जिसमें हाथ – पाँव भी सम्मिलित है । )

✦ इसमें लाल पगड़ी भी आ रही है । 
( वाक्य में लाल पगड़ी का मतलब सिपाही से है ,  इसमें लाल पगड़ी भी आ रही है और सिपाही भी । यहाँ मुख्यार्थ ( लाल पगड़ी ) के साथ लक्ष्यार्थ ( सिपाही ) का भी बोध हो रहा है । 

2. लक्षण  लक्षणा  – इसमें मुख्यार्थ पूरी तरह समाप्त हो जाता है ,  तभी लक्ष्यार्थ का बोध होता है । 
अर्थात जहाँ लक्ष्यार्थ  से निकलने वाले अर्थ में वाच्यार्थ न सम्मिलित होकर केवल उस शब्द लक्षण ही सम्मिलित रहता है, उसे लक्षण लक्षणा कहा जाता है । 

जैसे  –
✦ दोनों घरों  में  अच्छा  तालमेल  है । 
(  वाक्य  में  दोनों घरों  के  सदस्यों  के  तालमेल  के बारें  में  बताया गया है  ,  यहाँ  घर  से  कोई  अर्थ  सम्मिलित नहीं  है  । ) 

✦ यह  गाँव  गरीब  है  । 
(  वाक्य  में  गाँव  के  लोगों  के गरीब  होने  को बताया है  ,  इसमें  गाँव  से  कोई अर्थ  सम्मिलित नहीं  है ।  ) 

दोस्तो हमने इस आर्टिकल में Lakshana Shabd Shakti in Hindi के साथ – साथ Lakshana Shabd Shakti kise kahate hain,Lakshana Shabd Shakti ke bhed के बारे में पढ़ा। हमे उम्मीद है आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। आपको यहां Hindi Grammar के सभी टॉपिक उपलब्ध करवाए गए। जिनको पढ़कर आप हिंदी में अच्छी पकड़ बना सकते है।

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