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Manvikaran Alankar (मानवीकरण अलंकार) : मानवीकरण अलंकार किसे कहते है? परिभाषा, भेद एवं उदाहरण

मानवीकरण अलंकार (Manvikaran Alankar) : परिभाषा, भेद और उदाहरण | Manvikaran Alankar in Hindi – इस आर्टिकल में हम मानवीकरण अलंकार, मानवीकरण अलंकार किसे कहते कहते हैं, मानवीकरण अलंकार के प्रकार और उनके भेदों को उदाहरण के माध्यम से पढ़ेंगे।  इस टॉपिक से सभी परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाते है।  हम यहां पर मानवीकरण अलंकार के सभी भेदों/प्रकार के बारे में सम्पूर्ण जानकारी लेके आए है। hindi में Manvikaran Alankar से संबंधित बहुत सारे प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं और राज्य एवं केंद्र स्तरीय बोर्ड की सभी परीक्षाओं में यहां से questions पूछे जाते है।  Manvikaran Alankar in Hindi के बारे में उदाहरणों सहित इस पोस्ट में सम्पूर्ण जानकारी दी गई है।  तो चलिए शुरू करते है –

Manvikaran Alankar

Manvikaran Alankar

मानवीकरण अलंकार किसे कहते है? manvikaran alankar kise kahate hain

काव्य में जहाँ पर जड़ में चेतन का आरोप होता है, तो वहाँ पर ‘मानवीकरण अलंकार’ होता है। अर्थात जहाँ पर जड़ प्रकृति पर मानवीय भावनाओं तथा क्रियाओं का आरोप होता है, वहाँ पर ‘मानवीकरण अलंकार’ होता है।

मानवीकरण अलंकार की परिभाषा | manvikaran alankar ki paribhasha

मानवीकरण अलंकार की परिभाषा –
जहाँ निर्जीव पर मानव सुलभ गुणों और क्रियाओं का आरोप किया जाता है,वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
उदाहरण – मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के। । 

मानवीकरण अलंकार के उदाहरण | Manvikaran Alankar Ke Udaharan

✦ नेत्र निमीलन करती मानो
प्रकृति प्रबुद्ध लगी होने।'
स्पष्टीकरण - यहाँ आँखें खोलती हुई प्रकृति में मानवीय कियाओं के आरोपण से मानवीकरण अलंकार है।
✦ ऊषा उदास आती है।
मुख पीला ले जाती है॥
✦ संध्या घन माला की सुंद
ओढ़े रंग-बिरंगी छींट।
 उषा सुनहरे तीर बरसाती, जय लक्ष्मी-सी उदित हुई।
 बीती विभावरी जाग री
अंबर पनघट में डुबो रही
तारा घट उषा नागरी।
 गुलाब खिल कर बोला-मैं आग का गोला नहीं प्रीत की कविता हूं।

यह भी पढ़े – अलंकार

मानवीकरण अलंकार के उदहारण | Manvikaran Alankar ke Udaharan

और सरसों की ना पूछो हो गई सबसे सयानी।
स्पष्टीकरण – सरसों के पौधे को नवयुवती माना है जिस पर पीले फूल आने से ऐसे प्रतीत हो रहे हैं जैसे विवाह से पूर्व उसे हल्दी लगा दी गई हो।

यह हरा ठीगना चना, बांधे मुरैठा शीश पर।
स्पष्टीकरण – चने के पौधे को आदमी माना हे और उसके फली को मुरेठा/ टोपी मान कर मानव के समान दिखया गया है।

मैं तो मात्र मृत्तिका हूं कुंभ और कलश बनकर।
जल लाती तुम्हारी अंतरंग प्रिया हो जाती हूं। ।
स्पष्टीकरण – मृतिका अर्थात मिट्टी कह रही है कि मैं कलश या कुंभ बनकर कार्य करती हूं ,जिसमें मदिरा या जल आदि को भरकर अंतरंग अर्थात अकेलेपन की साथी या प्रिया बन जाती हूं।

छोड़ो मत अपनी आन, सीस कट जाए,
मत झुको अनर्थ पर, भले ही व्योम फट जाए। ।

चल रे चल – मेरे पागल बादल। ।
स्पष्टीकरण – बादल को पागल के समान माना है अर्थात मानव के साथ संबंध स्थापित करने का प्रयास किया है आतः यह मानवीकरण अलंकार सिद्ध होता है।

अब जागो जीवन के प्रभात
वसुधा पर ओस बने बिखरे ।
हिमकन आंसू जो क्षोभ भरे
उषा बटोरती अरुण गात।।
स्पष्टीकरण – यहां कवि ने प्रकृति के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है , ओस की भाँति अंग्रेज बिखरे हुए हैं जिन्हें हटाने दूर भगाने का संदेश दिया है। अरुण गात अर्थात लाल गाल के साथ मानवीकरण अलंकार का संबंध जोड़ा गया है।

दोस्तो हमने इस आर्टिकल में Manvikaran Alankar in Hindi के साथ – साथ Manvikaran Alankar kise kahate hain, Manvikaran Alankar ki Paribhasha, Manvikaran Alankar ke bhed के बारे में पढ़ा। हमे उम्मीद है आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। आपको यहां Hindi Grammar के सभी टॉपिक उपलब्ध करवाए गए। जिनको पढ़कर आप हिंदी में अच्छी पकड़ बना सकते है।

अलंकार के भेद | Alankar Ke Bhed
1. शब्दालंकार
2. अर्थालंकार 

शब्दालंकार के भेद
1. अनुप्रास अलंकार
2. यमक अलंकार
3. श्लेष अलंकार
4. पुनरुक्ति अलंकार
5. विप्सा अलंकार
6. वक्रोक्ति अलंकार

अनुप्रास अलंकार के भेद-
(i) छेका अनुप्रास
(ii) वृत्या अनुप्रास
(iii) श्रुत्या अनुप्रास
(iv) अन्तयानुप्रास
(v) लाटानुप्रास

अर्थालंकार के भेद | Arthalankar ke bhed

1.उपमा अलंकार
2.रूपक अलंकार
3.उत्प्रेक्षा अलंकार
4. अतिशयक्ति अलंकार
5. मानवीकरण अलंकार
6. सन्देह अलंकार
7. दृष्टान्त अलंकार
8. दिपक अलंकार
9. उपमेयोपमा अलंकार
10. प्रतीप अलंकार
11. अनन्वय अलंकार
12. भ्रांतिमान अलंकार
13. विशेषोक्ति अलंकार
14. विभावना अलंकार
15. त्यतिरेक अलंकार
16. अपहृति अलंकार
17. अर्थान्तरन्यास अलंकार
18.उल्लेख अलंकार
19. विरोधाभाष अलंकार
20.असंगति अलंकार
21.काव्यलिंग अलंकार
22. अन्योक्ति अलंकार

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