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आकर के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार | Types of Computer Based On Size

जब से Computer विकास  हुआ है तब से उसके आकार और कार्य क्षमता में बदलाव  होते हैं रहें हैं, कंप्‍यूटर को आकार के आधार पर चार भागों में विभाजित में गया है सुपर कंप्‍यूटर, मेनफ्रेम कंप्‍यूटर, मिनी कंप्‍यूटर एव माइक्रो कंप्‍यूटर तो दोस्तों आईये जानते हैं आकार के आधार पर कंप्‍यूटर का वर्गीकरण –

1. माइक्रो कम्प्यूटर (Micro Computer) :-

सन् 1971 में जब सिलिकॉन की चिप का विकास हुआ जिससे लघु कम्प्यूटर की उपलब्धता सम्भव हुई। पहला माइक्रो कम्प्यूटर सन् 1981 में आई. बी. एम. (International Business Machines) कम्पनी ने निकाला था। ऐसे कम्प्यूटर का हृदय माइक्रो प्रोसेसर कहलाता है। इसमें एक माइक्रो प्रोसेसर लगे होने के कारण इन्हें माइक्रो कम्प्यूटर कहा जाता है। इनमें एक CPU लगा होता है। यह कीमत में सस्ते तथा आकार में छोटे होते हैं, इसलिए इनको व्यक्तिगत उपयोग के लिए घर या बाहर किसी भी कार्यक्षेत्र में लगाये जा सकते हैं। इन्हें पर्सनल कम्प्यूटर या पी.सी. या डेस्कटॉप कम्प्यूटर भी कहते हैं।

उपयोग :- व्यवसाय, घर, मनोरंजन, चिकित्सा, विद्यालय आदि

2. मिनी कम्प्यूटर (Mini Computer) :-

मिनी कम्प्यूटर मध्यम आकार (मेनफ्रम से छोटे) के कम्प्यूटर होते हैं। सबसे पहले मिनी कम्प्यूटर सन् 1965 ई. में डी. ई. सी. (DEC-Digital Equipment Corporation) नामक कम्पनी ने PDP-8 मिनी कम्प्यूटर निकाला जो एक रेफ्रिजरेटर के आकार का था तथा इसकी कीमत 18000/- डॉलर थी। यह माइक्रो कम्प्यूटर की तुलना में अधिक कार्यक्षमता वाले होते हैं। इनकी कीमत माइक्रो कम्प्यूटर से अधिक होती है और यह व्यक्तिगत रूप से नहीं खरीदे जा सकते। इन्हें छोटी या मध्यम स्तर की कम्पनियाँ काम में लेती हैं। इसमें एक से अधिक CPU होते हैं। मिनी कम्प्यूटर में एक से अधिक व्यक्ति काम कर सकते हैं। इनकी मेमोरी और गति माइक्रो से अधिक और मेनफ्रेम से कम होती है। 80386 सुपर चिप का प्रयोग करने पर वह सुपर मिनी कम्प्यूटर में बदल जाता है।

उपयोग :- कम्पनी, यात्री आरक्षण, अनुसंधान, बैकिंग आदि

3. मेनफ्रेम कम्प्यूटर (Mainframe Computer) :-

इनकी संरचना इस प्रकार से की जाती है कि वे बड़े मात्रा में डाटा व सूचनाओं को प्रोसेस कर सकें तथा विभिन्न प्रकार के कार्यों को पूरा कर सकें। इनका उपयोग बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ, बैंक तथा सरकारी विभाग एक केन्द्रीय कम्प्यूटर के रूप में करते है। यह आकार में बहुत बड़े होते हैं तथा इनकी संग्रहण क्षमता व गति तीव्र होती है। इस पर सैंकड़ो उपयोगकर्ता एक साथ कार्य कर सकते हैं तथा यह लगातार चौबीसों घंटे कार्य कर सकते हैं। इनको एक नेटवर्क या माइक्रो कम्प्यूटर से परस्पर जाड़ा जा सकता है।

उपयोग :- बैंकिंग, अनुसंधान, रक्षा, अंतरिक्ष, कम्पनियाँ, संस्थाएं आदि ।

4. सुपर कम्प्यूटर (Super Computer) :-

सुपर कम्प्यूटर सबसे बड़े आकार, सबसे अधिक गति व सबसे अधिक संग्रह-क्षमता वाले कम्प्यूटर होते हैं। इनमें अनेक CPU समान्तर क्रम में कार्य करते हैं। इस क्रिया को समान्तर प्रक्रिया कहते हैं। विश्व का प्रथम सुपर कम्प्यूटर 1976 ई. में क्रे-1 था जो क्रे रिसर्च कम्पनी द्वारा विकसित किया गया था। भारत का प्रथम सुपर कम्प्यूटर परम नामक था जिसको सी.डैक द्वारा 1991 में विकसित किया गया था। इसका विकसित रूप परम-1000 भी भारत ने तैयार कर लिया है।

उपयोग :- वैज्ञानिक शोध व खोज कार्य करना, अन्तरिक्ष-यात्रियों को अन्तरिक्ष में यात्रा हेतु भेजना, मौसम की भविष्यवाणी आदि

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