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वाक्य - विचार

जिस प्रकार वर्णों के मेल से शब्द बनते हैं , उसी प्रकार शब्दों के मेल से वाक्य बनते हैं । हम मन के भावों और विचारों को व्यक्त करने के लिए सार्थक शब्दों को व्याकरण के नियमों में बाँधते हैं , तब वाक्य की रचना होती है । 

यदि हम स्वतंत्र या सार्थक शब्दों को व्याकरण के नियमों में बाँधकर इनका व्यवस्थित समूह न बनाएँ तो ये हमारे मनोभावों को पूर्ण रूप से व्यक्त नहीं कर सकते हैं । 

पढ़िए और समझिए : 

( क ) विशाल पानी पीना । ( ख ) तमन्ना नहाना । ( ग ) माँ खाना बनाना । 

उपर्युक्त वाक्यों में ये सभी स्वतंत्र शब्द हैं । इनके अपने सार्थक अर्थ भी हैं , परंतु ये हमारे मनोभावों को पूर्ण रूप से व्यक्त नहीं कर रहे हैं , क्योंकि हमने इन्हें व्याकरण के नियमों के अनुसार व्यवस्थित समूहों में नहीं बाँधा । अब हम इन्हें व्याकरण के नियमों में बाँधकर लिखते हैं 

( क ) विशाल पानी पीता है । ( ख ) तमन्ना नहाती है । ( ग ) माँ खाना बनाती है । 

अब इनका अर्थ स्पष्ट हो रहा है , क्योंकि हमने इन्हें व्याकरण के नियमों में बाँधकर वाक्यों की रचना कर दी है । 

वाक्य की रचना के नियम ( Rules of Sentence Formation ) 

1. वाक्य की रचना कई पदों के सार्थक योग से होती है । 
2. कर्ता और क्रिया के बिना वाक्य अधूरा रहता है । 
3. वाक्य हमारे मनोभावों को पूर्ण रूप से प्रकट करने में समर्थ होना चाहिए । 
4. वाक्य में आने वाले पदों का एक विशेष क्रम होना चाहिए । 

उदाहरण के लिए : 

( क ) वाक्य में कर्ता के बाद क्रिया आती है । 

( ख ) कर्म , क्रिया और कर्ता के बीच में होता है । 

( ग ) परसर्ग संज्ञा या सर्वनामों के बाद लगाए जाते हैं । 

( घ ) परसर्ग सर्वनामों में मिलाकर लिखे जाते हैं । 

5. कभी – कभी कर्ता और क्रिया पद के बिना भी वाक्य बनाया जाता है ; जैसे 

विशाल : तमन्ना , तुम्हारा स्कूल कहाँ है ? 

वाक्य के अंग ( Parts of a Sentence )

वाक्य के दो अंग हैं 

( 1 ) उद्देश्य ( Subject ) तथा ( 2 ) विधेय ( Predicate ) |

( 1 ) उद्देश्य ( Subject ) – वाक्य का वह अंग जिसके बारे में कुछ कहा जाता है , उद्देश्य कहलाता है । 

( 2 ) विधेय ( Predicate ) – उद्देश्य के बारे में जो कुछ कहा जाए , वह ‘ विधेय ‘ कहलाता है । 

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वाक्य में उद्देश्य और विधेय के अतिरिक्त भी पद होते हैं । उद्देश्य से जुड़ा अतिरिक्त पद उद्देश्य का विस्तार कहलाता है तथा विधेय से जुड़ा अतिरिक्त पद ‘ विधेय का विस्तार ‘ कहलाता है । 

रचना के आधार पर वाक्य के प्रकार ( Kinds of Sentences Based on Formation ) 

रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं 

( 1 ) सरल वाक्य ( Simple Sentences ) – सरल वाक्यों में केवल एक उद्देश्य तथा एक विधेय होता है ; जैसे 

( क ) विशाल पढ़ता है । ( ख ) तमन्ना खेलती है । ( ग ) मैं बाजार जाऊँगी । 

इन वाक्यों मे एक उद्देश्य तथा एक विधेय है

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( 2 ) संयुक्त वाक्य ( Compound Sentences ) – इन वाक्यों में दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य होते हैं । इनमें उपवाक्य समुच्चयबोधक अव्ययों द्वारा जुड़े होते हैं ; जैसे 

( क ) वह गया तो था परंतु खाली हाथ लौट आया । 

( ख ) विशाल स्कूल जाता है और मन लगाकर पढ़ता है । 

( ग ) तमन्ना पढ़ रही और नीतू नाच रही है । 

इन वाक्यों में परंतु , और शब्द समुच्चयबोधक हैं ; अत : ये संयुक्त वाक्य हैं । 

( 3 ) मिश्रित वाक्य ( Complex Sentences ) – इन वाक्यों में एक मुख्य उपवाक्य होता है और एक या एक से अधिक आना उपवाक्य उस पर आश्रित होते हैं । इसमें भी उपवाक्य समुच्चयबोधक अव्ययों द्वारा जुड़े होते हैं ; जैसे 

( क ) पिता जी ने कहा कि वे दिल्ली जाएंगे । 

( ख ) विशाल ने कहा कि मैं रोहित से मिलूँगा । 

इन वाक्यों में 

पिता जी ने कहा – मुख्य उपवाक्य
विशाल ने कहा – मुख्य उपवाक्य
कि – समुच्यबोधक
वे दिल्ली जायेगे – आश्रित उपवाक्य
मैं रोहित से मिलूंगा – आश्रित उपवाक्य

प्रयोग के आधार पर वाक्य के प्रकार ( Kinds of Sentences Based on Uses ) 

प्रयोग के आधार पर वाक्य आठ प्रकार के होते हैं 

( 1 ) विधानवाचक वाक्य ( Assertive Sentence ) — वह वाक्य जिनमें क्रिया के करने अथवा होने का सामान्य कथन हो , उन्हें ‘ विधानवाचक वाक्य ‘ कहते हैं ; जैसे 

( क ) वह पढ़ता है । ( ख ) सूर्य पूरब से उदय होता है । 

( 2 ) प्रश्नवाचक वाक्य ( Interrogative Sentence ) — वह वाक्य जिनमें प्रश्न किया जाए , उन्हें ‘ प्रश्नवाचक वाक्य ‘ कहते हैं ; जैसे 

( क ) तुम कहाँ जा रहे हो ? ( ख ) आप क्या कर रहे हो ? 

( 3 ) निषेधवाचक वाक्य ( Negative Sentence ) – जिन वाक्यों में क्रिया के न होने अथवा न करने का भाव प्रकट हो , उन्हें ‘ निषेधवाचक वाक्य ‘ कहते हैं ; जैसे 

( क ) वह स्कूल नहीं जाता है । ( ख ) बच्चे को मत रुलाओ । 

( 4 ) संकेतवाचक वाक्य ( Conditional Sentence ) – जिन वाक्यों में एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर होता है ; उन्हें संकेतवाचक वाक्य ‘ कहते हैं ; जैसे 

( क ) आप आते तो मैं भी चल पड़ता । ( ख ) यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती । 

( 5 ) आज्ञावाचक वाक्य ( Sentence Indicating Command ) – जिन वाक्यों में किसी बात या कार्य के लिए आज्ञा , प्रार्थना या उपदेश का भाव रहता है , उन्हें ‘ आज्ञावाचक संज्ञा ‘ कहते हैं ; जैसे 

( क ) अपने से बड़ों का आदर करो । ( ख ) अपना गृहकार्य करो । 

( 6 ) संदेहवाचक वाक्य ( Sentence Indicating Doubt ) – जिन वाक्यों से संदेह या संभावना प्रकट हो , उन्हें ‘ संदेहवाचक वाक्य ‘ कहते हैं ; जैसे 

( क ) शायद , वह आज आएगा । ( ख ) शायद , हम शिमला जाएँ । 

( 7 ) इच्छावाचक वाक्य ( Illative Sentence ) – जिन वाक्यों में इच्छा , आशा , कामना , आशीर्वाद आदि का भाव प्रकट होता है , उन्हें ‘ इच्छावाचक वाक्य ‘ कहते हैं ; जैसे 

( क ) आज तो मैं जलेबी खाऊँगा । ( ख ) ईश्वर करे तुम परीक्षा में प्रथम श्रेणी प्राप्त करो । 

( 8 ) विस्मयादिवाचक वाक्य ( Exclamatory Sentence ) – जिन वाक्यों में विस्मय , हर्ष , शोक , घृणा आदि भाव प्रकट होता है , उन्हें ‘ विस्मयादिवाचक वाक्य ‘ कहते हैं ; जैसे 

( क ) छिः छिः ! कितनी गंदगी है । ( ख ) शाबाश ! ऐसे ही सफलता प्राप्त करते रहो ।

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