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vismayadibodhak – विस्मयादिबोधक किसे कहते हैं? परिभाषा, भेद और उदाहरण

विस्मयादिबोधक : परिभाषा, भेद और उदाहरण | vismayadibodhak in Hindi – इस आर्टिकल में हम विस्मयादिबोधक ( vismayadibodhak), विस्मयादिबोधक किसे कहते हैं, विस्मयादिबोधक की परिभाषा, विस्मयादिबोधक के भेद/प्रकार और उनके प्रकारों को उदाहरण के माध्यम से पढ़ेंगे।  इस टॉपिक से सभी परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाते है।  हम यहां पर विस्मयादिबोधक ( vismayadibodhak) के सभी भेदों/प्रकार के बारे में सम्पूर्ण जानकारी लेके आए है। Hindi में विस्मयादिबोधक ( vismayadibodhak) से संबंधित बहुत सारे प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं और राज्य एवं केंद्र स्तरीय बोर्ड की सभी परीक्षाओं में यहां से questions पूछे जाते है। vismayadibodhak in hindi grammar विस्मयादिबोधक इन हिंदी के बारे में उदाहरणों सहित इस पोस्ट में सम्पूर्ण जानकारी दी गई है।  तो चलिए शुरू करते है –

विस्मयादिबोधक की परिभाषा

वे शब्द जो हर्ष ,शोक, घृणा , विस्मय, लज्जा , आश्चर्य,चेतावनी  आदि भावो को प्रकट करते है , विस्मयादिबोधक अव्यय कहलाते है। 

अर्थात “ वे शब्द जो विभिन्न मनोभावों को प्रकट करते है , विस्मयादिबोधक शब्द कहलाते है। “

विस्मयादिबोधक के वाक्य

✦ अहा ! बहुत मीठा सेब है।
✦ वाह ! कितनी सुंदर लड़की है।
✦ हे भगवान ! सबको खुश रखना।
✦ उफ ! कितनी गर्मी है।
✦ अरे ! ये सब क्या है ?

( उपर्युक्त वाक्यों में अहा, वाह, हे भगवान, उफ, अरे  शब्द मन के भावो को प्रकट करते है अतः “ये विस्मयादिबोधक अव्यय” है )

विस्मयादिबोधक के भेद :

विस्मयादिबोधक के दस भेद होते हैं जो निम्न प्रकार है –

विस्मयादिबोधक के भेद | vismayadibodhak Ke Bhed
1. शोकबोधक  (Shok Bodhak )
2.  स्वीकृतिबोधक   ( Swikrati Bodhak )
3. संबोधनबोधक  ( Sambodhan Bodhak )
4. भयबोधक ( Bhay Bodhak )
5. तिरस्कारबोधक ( Tiraskar Bodhak )
6. हर्षबोधक  ( Harsh Bodhak )
7. आशीर्वादबोधक ( Ashirvad Bodhak )
8. अनुमोदनबोधक ( Anumodan Bodhak )
9. विदासबोधक ( Vidas Bodhak )
10. विवशताबोध  ( Vivashta Bodhak )

1. शोकबोधक (Shok Bodhak )

शोक बोधक से शोक/ दुख के प्रकट होने का बोध होता है। शोक बोधक अव्यय का प्रयोग दुख प्रकट करने के लिए किया जाता है।
जहां पर हाय !, हे राम !, बाप रे !, उफ !, आह !, हा !, आदि शब्द आते हैं वहां पर शोकबोधक होता हैं।

जैसे :-

  • हे राम!
  • बाप रे बाप!
  • ओह!
  • उफ़!
  • हां! आदि। 

उदाहरण :-

  • हे राम! उनकी आत्मा को शांति देना।
  • हे राम ! बहुत बुरा हुआ।
  • बाप रे बाप! मैं तो मर ही जाऊंगा।
  • हाय! यह क्या हो गया।
  • हाय नानी जी चल बसी।
  • ओह! मुझे अफसोस है।

2. स्वीकृतिबोधक ( Swikrati Bodhak )

तिरस्कार बोधक के विपरीत स्वीकृति बोधक का उपयोग वहां किया जाता है जहां किसी भी चीज को स्वीकार करना हो अर्थात स्वीकृति बोधक स्वीकार की भावना प्रकट करते हैं।
जहां पर अच्छा !  ठीक !  हाँ !  जी हाँ !  बहुत अच्छा !  जी ! आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है वहां स्वीकृतिबोधक होता हैं ।

जैसे :-

  • अच्छा !
  • ठीक !
  • हाँ !
  • जी हाँ !
  • बहुत अच्छा !
  • जी ! आदि।

उदाहरण :-

  • अच्छा ! यह बात है तो ठीक है!
  •  अच्छा ! यहां जाना मना है ।
  • जी हाँ! मैं ही रोहन हूं 
  • जी हां ! मैं वही हूं जिसने आपको फोन किया था!
  • बहुत अच्छा ! मैं यही चाहता था!

3. संबोधनबोधक  ( Sambodhan Bodhak )

संबोधन बोधक का उपयोग हम किसी व्यक्ति या वस्तु को संबोधित करने के लिए करते हैं।
जहां पर हो ! अजी ! ओ ! रे ! री ! अरे ! अरी ! हैलो ! ऐ! आदि शब्दो का प्रयोग किया जाता है वहां पर संबोधनबोधक होता हैं । 

जैसे :-

  • अरे!
  • अजी!
  • हेलो! आदि।

उदाहरण :-

  • अजी ! सुनते हो।
  • अजी ! क्या कर रहे हो ।
  • अरे ! मेरी बात सुनो ।
  • हैलो ! आप कौन हो ?
  • अरे ! तुम कहां गए थे?
  • हैलो ! आप कौन बोल रहे हैं ?

4. भयबोधक ( Bhay Bodhak )

भय बोधक का प्रयोग वहां किया जाता है जहां भय अर्थात डर की भावना प्रकट करनी हो।
जहां पर बाप रे बाप ! , ओह ! , हाय ! राम , उई माँ ! , त्राहि – त्राहि जैसे शब्दों से भय का बोध होता है, वहां पर भयबोधक होता है

जैसे :-

  • बाप रे बाप !
  • हाय !
  • ओह !
  • उई माँ !
  • त्राहि – त्राहि आदि।

उदाहरण :-

  • उई माँ! मै गिर गई ।
  • हाय! यह क्या हो गया?
  • हाय ! राम,  अब तुम्हारा क्या होगा ?
  • बाप रे बाप ! सांप निकला है ।
  • उई माँ! बहुत जोर से दर्द हो रहा है।
  • बाप रे बाप ! इतना बड़ा सांप।

5. तिरस्कारबोधक ( Tiraskar Bodhak )

तिरस्कार बोधक से हमें तिरस्कार अर्थात किसी भी कार्य के लिए मना करने का बोध होता है। इनका प्रयोग वहां किया जाता है जहां तिरस्कार की भावना को प्रकट करना हो।
जहां पर छि: !, धिक्कार !, थू-थू, हट !, धिक् !, धत !, चुप ! आदि शब्द आते हैं वहां पर शोकबोधक होता हैं।

जैसे :-

  • धिक्कार !
  • छि: !
  • थू-थू
  • हट !
  • चुप !
  • धिक् !
  • धत !

उदाहरण :-

  • छि:! यह बहुत गंदा है!
  • अगर तुम यह भी नहीं कर सके तो धिक्कार! है तुम पर!
  • चुप! लगता है कोई आ रहा है!

6. हर्षबोधक  ( Harsh Bodhak )

हर्ष बोधक का उपयोग वहां किया जाता है जहां खुशी की भावना प्रकट करने हो अर्थात हर्ष बोधक खुशी की भावना प्रकट करते हैं।
जहां पर वाह – वाह ! धन्य ! अति सुन्दर ! अहा ! शाबाश ! ओह ! आदि शब्दों के जरिए हर्ष उत्पन्न होता है, जिस कारण इन्हें हर्षबोधक कहा जाता है ।

जैसे :-

  • वाह -वाह !
  • धन्य !
  • अहा !
  • अति सुन्दर !
  • शाबाश ! आदि।

उदाहरण :-

  • वाह ! तुम परीक्षा में पास हो गए ।
  • वाह! यह बहुत स्वादिष्ट व्यंजन है।
  • अहा ! यह बहुत अच्छा हुआ।
  • शाबाश ! तुमने आखिर यह कर ही दिखाया।
  • वाह ! यह तो किसी चमत्कार से कम नहीं।
  • शाबाश ! तुमने यह कर दिखाया।

7. आशीर्वादबोधक ( Ashirvad Bodhak )

आशीर्वाद बोधक का प्रयोग वहां किया जाता है जहां किसी को भी आशीर्वाद देना हो।
जहां पर जीते रहो ! खुश रहो ! सदा सुखी रहो ! दीर्घायु हो इस प्रकार के शब्दों का प्रयोग जहां होता है, वहां पर आशीर्वाद बोधक होता है ।

जैसे :-

  • खुश रहो!
  • जीते रहो!
  • सदा सुखी रहो!
  • दीर्घायु हो आदि।

उदाहरण :-

  • सदा खुश रहो ! पुत्र।
  • सदा खुश रहो! बेटा।
  • जीते रहो ! जल्दी शादी हो।
  • जीते रहो ! भगवान करे तुम्हें कामयाबी मिले।

8. अनुमोदनबोधक ( Anumodan Bodhak )

अनुमोदन बोधक का उपयोग वहां किया जाता है जहां अनुमोदन की भावना प्रकट होती है।
जहां पर हाँ ! बहुत अच्छा ! अवश्य ! आदि इस तरीके के शब्द अनुमोदन बोधक कहलाते हैं ।

जैसे :-

  • हाँ !
  • बहुत अच्छा !
  • अवश्य ! आदि।

उदाहरण :-

  • अवश्य ! आप जा सकते है ।
  • अवश्य! तुम यह काम सकते हो।
  • हां । तुम जरूर जीतोगे ।
  • बहुत अच्छा ! ऐसे ही करते रहो।
  • बहुत अच्छा ! मुझे तुम पर भरोसा है ।
  • हाँ हाँ ! हम ज़रूर मिलेंगे।

9. विदासबोधक ( Vidas Bodhak )

विदास बोधक का उपयोग वहां किया जाता है जहां विदाई की भावना प्रकट होती है।
जहां परअच्छा ! अच्छा जी ! टा -टा ! आदि इस प्रकार के शब्दों से विदाई के भाव का पता चलता है ।

जैसे :-

  • अच्छा जी !
  • अच्छा !
  • टा -टा ! आदि।

उदाहरण :-

  • अच्छा ! अब हम कल मिलते है ।
  • टा-टा ! कल मिलते हैं।
  •  मैं जा रहा हूं । टाटा !
  • अच्छा ! फिर मिलेंगे।

10. विवशताबोध ( Vivashta Bodhak )

विवशता बोधक का उपयोग कहां किया जाता है जहां मजबूरी अर्थात विवशता की भावना प्रकट होती है।
जहां पर काश ! कदाचित  ! हे भगवान ! इस प्रकार के शब्दों से विवशता की भावना का पता चलता है वहां विवशताबोधक होता है ।

जैसे :-

  • कदाचित् !
  • काश !
  • हे भगवान ! आदि।

उदाहरण :-

  • हे भगवान! मैं परीक्षा में पास क्यों नहीं होता हूं ।
  • काश! मैं भी अमीर होता।
  • काश! मैं हवा में उड़ पाता ।
  • हे भगवान! उसकी रक्षा करना।
  • मैंने चोरी नहीं कि है कदाचित आपको गलतफहमी है ।

विस्मयादिबोधक अव्यय 

मनोभावविस्मयादिबोधक अव्यय
हर्षबोधकअहा !, वाह! , शाबाश ! , बहुत खूब !
स्वीकारबोधकहाँ ! , ठीक है ! 
शोकबोधक बाप रे ! ,त्राहि-त्राहि ! , हे राम ! , आह !
आश्चर्यबोधक हरे ! , क्या ! , वाह !, अहो ! , हैं !
संबोधनबोधकअरे ! , ओ ! , अजी ! , रे ! , री !
चेतवनीबोधकखबरदार ! , होशियार ! , सावधान !
घृणाबोधकछिः ! , धिक्कार !, हट ! , धिक् !
vismayadibodhak

निपात-
परिभाषा – वे अव्यय शब्द जो किसी शब्द के बाद लगकर विशेष प्रकार का बल देते है ,“निपात या अवधारक शब्द” कहलाते है। 

जैसे- 
✦ रोहन अभी तक नहीं आया।
✦ रोहन तो आएगा , राधा भी आएगी।
✦ अमित आज ही जा रहा है। 

दोस्तो हमने इस आर्टिकल में vismayadibodhak in Hindi के साथ – साथ vismayadibodhak kise kahate hain, vismayadibodhak ki Paribhasha, vismayadibodhak ke bhed के बारे में पढ़ा। हमे उम्मीद है आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। आपको यहां Hindi Grammar के सभी टॉपिक उपलब्ध करवाए गए। जिनको पढ़कर आप हिंदी में अच्छी पकड़ बना सकते है।

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