विसर्ग संधि – परिभाषा, नियम और 50+ महत्वपूर्ण उदाहरण
विसर्ग संधि क्या है?
हिंदी व्याकरण में संधि एक महत्वपूर्ण विषय है और उसी का एक भाग है विसर्ग संधि। जब किसी शब्द के अंत में ‘ः’ (विसर्ग) हो और उसके बाद आने वाले शब्द के पहले अक्षर के अनुसार परिवर्तन हो जाए, तो उसे विसर्ग संधि कहते हैं। यह टॉपिक कक्षा 9, 10 और सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।
विसर्ग संधि –
विसर्ग ( : ) के साथ स्वर या व्यंजन के मिलने से जो परिवर्तन होता है, उसे ‘ विसर्ग संधि ‘ कहते हैं ।
विसर्ग संधि के उदाहरण : Visarg Sandhi Ke Udaharan
✦ निः + भर = निर्भर
✦ निः + ठुर = निष्ठुर
✦ धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
✦ मनः + ताप = मस्तान
✦ निः + जन = निर्जन
✦ निः + रोग = नीरोग
✦ निः + पाप = निष्पाप
नियम – 1
: + स्वर ‘ओ” के बाद कोई सघोस व्यंजन था य व र ल में से कोई एक वर्ण हो तो विच्छेद में ओ का (:) हो जाता है।
उदाहरण
- अधोगति – अधः + गति
- अधोवस्त – अधः + वस्त
- मनोबल – मन: +बल
- तपोवन – तपः + वन
- मनोज – मनः स्ज
- अधोगामी – अधः+ जामी
- तपोधन तपः + धन
- तपोवन – तप: + पन
- मनोदशा – मनः + दशा
- मनोरथ – मन: + रथ
- मनोहर मन: + हर
- मनोविज्ञान – मनः + विज्ञान
- रजोगुण – रजः + गुण
- अधोलिखित – अधः + लिखित
- मनोरंजन मन: + रंजन
- शिरोधार्य – शिर: + धार्य
- पयोधि – पयः + धि
- पयोधर पयः + धर
- यशोगाथा – यशः + गाथा
नियम – 2
श, ष, स् के बाद अघोस व्यंजन (1,2) हो तो विच्छेद करते समय श, ष् से का विसर्ग हो जाता है
उदाहरण
- निश्चय – निः + चय
- दुष्काल – दु: + काल
- निस्तार – निः + तार
- निश्चित – निः + चित
- दुस्तार – दुः + तर
- दुष्परिणाम- दु: + परिणाम
- चतुष्कीण – चतुः + कोण
- हरिश्चन्द्र – हरि + चन्द्र
- निश्छल – निः + तहका छल
- निष्कर्मण- नि: + कर्मण
- निस्तारण – निः + तारण
- दुश्चरित – दुः + चरित्त
- आविष्कार – आविः + कार
- नमस्कार – नम: + कार
- मनस्तेज – मनः + तेज
- मनस्संतान – मनः + संतान
नियम – 3
श्श, ष्ष, रूस आर्थ तो श, ष, स् का विसर्ग हो जाता है
उदाहरण
- निशांत – निः+ शांत
- दुश्शेत – दु: + शंत
- निश्शुल्क – निः शुल्क
- निस्सार – निः + सार
- दुस्साहस – दुः + साहस
- निस्स – नि:+स
- मशशरीर – यशः + शरीर
- निस्संतान – निः + संतान
- दुस्स्वप्न – दुः + स्वप्न
- दुस्साहस – दु: + साहस
नियम – 4
र के बाद सघोष व्यंजन या य्, र, ल, व, ह आये तो विच्छेत करते समय र का लोप प विसर्ग लग जाता है।
उदाहरण
- निर्गम – निः + गम
- निर्वाध – निः + बाध
- निर्गुण – नि: + गुन
- निर्वचन – निः + वचन
- निर्जन – निः+ जन –
- निर्झर – निः + सर
- दुर्गम – दु: + गम
- दुर्बोध – दुः + बोध
- दुर्वचन- दुः + वचन
- धुनुर्वेद – धनु : + वेद
- निर्दोष – निः + दोष
- निर्गमन – नि: + गमन
- दुर्दशा – दु: + दशा
- निर्मल – निः+मल
- निर्बल- निः+ बल
- धनुर्धारि – धनुः + धारि
- निराकार – निर :आकार
नियम – 5
ई, ऊ के बाद र हो तो विच्छेद करते समय ई, ऊ – इ, उ, व (:) लग जाता है।
उदाहरण
- नीरस – निः + रस
- नीरोग – निः + रोग
- नीरन्ध्र – निः + रन्ध्र
- चक्षुरोग – चम्मुः + रोग
- नीख – नि: + ख
- नीरद – नि: +रद
- नौरस – नि: + रस
नियम – 6
“अ” के बाद : हो तथा : के बाद क, ख का / प, फ, विसर्ग का लोप नहीं होता है।
उदाहरण
- उतः पुर – उत: + पुर
- मनः कामना- मनः + कामना
- प्रात: काल – प्रात: + काल
- अंत:करण – अंत: + करण
- पयः + पान – पयः + पान
नियम – 7
अ के बाद विसर्ग हो और बाद स्वर हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है
उदाहरण
- यशइच्छा – यशः + इच्छा
- अतएव – अतः + एव
- तपउत्तम – तपः + उत्तम
- मनउच्छेद – मन : + उच्छेद
FAQ ( Frequently Asked Questions )
जब किसी शब्द के अंत में ‘ः’ (विसर्ग) आता है और उसके बाद कोई दूसरा शब्द जुड़ता है, तो उच्चारण की सुविधा के कारण ‘ः’ में परिवर्तन हो जाता है। इसी परिवर्तन को विसर्ग संधि कहते हैं।
संधि का मुख्य उद्देश्य बोलने और पढ़ने में सरलता लाना है। यदि शब्दों को बिना बदले जोड़ दिया जाए तो उच्चारण कठिन हो सकता है, इसलिए भाषा के नियम के अनुसार परिवर्तन कर दिया जाता है।
कई बार ‘ः’ का रूप स, श या ष में बदल जाता है।
कुछ स्थितियों में यह ‘र’ में बदल जाता है।
कभी-कभी ‘ः’ पूरी तरह लुप्त भी हो जाता है।
यह परिवर्तन आगे आने वाले अक्षर पर निर्भर करता है।
निः + शब्द = निशब्द
निः + आशा = निराशा
दुः + ख = दुख
नहीं। ‘ः’ का परिवर्तन इस बात पर निर्भर करता है कि उसके बाद कौन-सा स्वर या व्यंजन आ रहा है। इसलिए हर उदाहरण में नियम देखकर ही संधि की जाती है।
विसर्ग संधि में परिवर्तन ‘ः’ के कारण होता है, जबकि स्वर संधि में दो स्वरों के मिलने से बदलाव आता है। दोनों के नियम अलग-अलग हैं।
अधिकतर प्रश्न संधि-विच्छेद, सही शब्द बनाना या गलत संधि पहचानने से जुड़े होते हैं। बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं में यह महत्वपूर्ण विषय माना जाता है।
🔹 भाग – 1 : संधि कीजिए
- निः + शब्द = ?
- निः + आशा = ?
- निः + अर्थ = ?
- निः + उपाय = ?
- निः + कर्ष = ?
- दुः + ख = ?
- दुः + चरित्र = ?
- दुः + जन = ?
- निः + शंक = ?
- निः + संदेह = ?
🔹 भाग – 2 : संधि-विच्छेद कीजिए
- निराशा
- निष्कर्ष
- निशब्द
- दुश्चरित्र
- दुर्जन
- निस्संदेह
- निरुपाय
- निष्पाप
- निष्कलंक
- निस्सार
🔹 भाग – 3 : सही विकल्प चुनिए
- ‘निष्काम’ का सही संधि-विच्छेद क्या है?
(क) निः + काम
(ख) नि + ष्काम
(ग) निः + ष्काम
(घ) नि + काम - ‘निराकार’ में किस प्रकार का परिवर्तन हुआ है?
(क) विसर्ग का लोप
(ख) विसर्ग का ‘र’ में परिवर्तन
(ग) विसर्ग का ‘स’ में परिवर्तन
(घ) कोई परिवर्तन नहीं - ‘दुष्कर’ का संधि-विच्छेद क्या होगा?
(क) दुः + कर
(ख) दु + ष्कर
(ग) दुः + ष्कर
(घ) दु + कर - ‘निश्छल’ का सही रूप कौन-सा है?
(क) निः + छल
(ख) नि + छल
(ग) निः + छ्ल
(घ) नि: + छल - ‘निष्पक्ष’ में विसर्ग किसमें बदला है?
(क) र
(ख) स
(ग) ष
(घ) लोप
🔹 भाग – 4 : कथन सही या गलत
- विसर्ग संधि में केवल ‘ः’ का ही परिवर्तन होता है।
- ‘निराश’ शब्द में ‘ः’ का परिवर्तन ‘र’ में हुआ है।
- ‘दुश्चरित्र’ में विसर्ग का ‘श’ में परिवर्तन हुआ है।
- हर जगह ‘ः’ का लोप हो जाता है।
- विसर्ग संधि में आगे आने वाले अक्षर का प्रभाव पड़ता है।
भाग – 1 : संधि कीजिए (उत्तर सहित)
1. निः + शब्द = निशब्द
यहाँ ‘ः’ के बाद ‘श’ आया है, इसलिए विसर्ग ‘श’ में बदल गया।
2. निः + आशा = निराशा
यहाँ ‘ः’ के बाद स्वर (आ) है, इसलिए ‘ः’ का ‘र’ में परिवर्तन हुआ।
3. निः + अर्थ = निरर्थ
‘अ’ स्वर आने पर ‘ः’ → ‘र’ हो जाता है।
4. निः + उपाय = निरुपाय
स्वर ‘उ’ आने पर ‘ः’ का ‘र’ में परिवर्तन।
5. निः + कर्ष = निष्कर्ष
‘क’ वर्ग के पहले ‘ः’ का ‘ष्’ में परिवर्तन होता है।
6. दुः + ख = दुख
यहाँ ‘ः’ का लोप हो गया।
7. दुः + चरित्र = दुश्चरित्र
‘च’ आने पर ‘ः’ → ‘श’।
8. दुः + जन = दुर्जन
‘ज’ आने पर ‘ः’ → ‘र’।
9. निः + शंक = निशंक
‘श’ आने पर ‘ः’ → ‘श’।
10. निः + संदेह = निस्संदेह
‘स’ आने पर ‘ः’ → ‘स्’ (दो स हो जाते हैं)।
🔹 भाग – 2 : संधि-विच्छेद (उत्तर सहित)
11. निराशा = निः + आशा
स्वर के कारण ‘ः’ → ‘र’।
12. निष्कर्ष = निः + कर्ष
‘क’ से पहले ‘ः’ → ‘ष्’।
13. निशब्द = निः + शब्द
‘श’ से पहले ‘ः’ → ‘श’।
14. दुश्चरित्र = दुः + चरित्र
‘च’ से पहले ‘ः’ → ‘श’।
15. दुर्जन = दुः + जन
‘ज’ से पहले ‘ः’ → ‘र’।
16. निस्संदेह = निः + संदेह
‘स’ से पहले ‘ः’ → ‘स्’।
17. निरुपाय = निः + उपाय
स्वर के कारण ‘ः’ → ‘र’।
18. निष्पाप = निः + पाप
‘प’ से पहले ‘ः’ → ‘ष्’।
19. निष्कलंक = निः + कलंक
‘क’ से पहले ‘ः’ → ‘ष्’।
20. निस्सार = निः + सार
‘स’ से पहले ‘ः’ → ‘स्’।
🔹 भाग – 3 : सही विकल्प (उत्तर सहित)
21. ‘निष्काम’ = (क) निः + काम
‘क’ से पहले ‘ः’ → ‘ष्’।
22. ‘निराकार’ = (ख) विसर्ग का ‘र’ में परिवर्तन
स्वर आने पर ‘ः’ → ‘र’।
23. ‘दुष्कर’ = (क) दुः + कर
‘क’ से पहले ‘ः’ → ‘ष्’।
24. ‘निश्छल’ = (क) निः + छल
‘छ’ से पहले ‘ः’ → ‘श’।
25. ‘निष्पक्ष’ में विसर्ग (ग) ‘ष’ में बदला है।
‘प’ से पहले ‘ः’ → ‘ष्’।
🔹 भाग – 4 : सही / गलत
26. सही
विसर्ग संधि में मुख्य परिवर्तन ‘ः’ का ही होता है।
27. सही
‘निराश’ = निः + आश (ः → र)
28. सही
‘दुश्चरित्र’ में ‘ः’ → ‘श’।
29. गलत
हर जगह लोप नहीं होता, नियम अनुसार परिवर्तन होता है।
30. सही
आगे आने वाले अक्षर के कारण ही परिवर्तन होता है।