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Karmadharaya Samas | कर्मधारय समास की परिभाषा, भेद और इसके उदाहरण

कर्मधारय समास (Karmadharaya Samas) : परिभाषा, भेद और उदाहरण | Karmadharaya Samas in Hindi – इस आर्टिकल में हम कर्मधारय समास (Karmadharaya Samas) , कर्मधारय समास किसे कहते कहते हैं (Karmadharaya Samas Kise Kahate Hain) कर्मधारय समास की परिभाषा, कर्मधारय समास के भेदप्रकार और उनके भेदों को उदाहरण के माध्यम से पढ़ेंगे।  इस टॉपिक से सभी परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाते है।  हम यहां पर कर्मधारय समास ( Karmadharaya Samas) के सभी भेदों/प्रकार के बारे में सम्पूर्ण जानकारी लेके आए है। hindi में कर्मधारय समास ( Karmadharaya Samas) से संबंधित बहुत सारे प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं और राज्य एवं केंद्र स्तरीय बोर्ड की सभी परीक्षाओं में यहां से questions पूछे जाते है।  Karmadharaya Samas in Hindi के बारे में उदाहरणों सहित इस पोस्ट में सम्पूर्ण जानकारी दी गई है।  तो चलिए शुरू करते है –

कर्मधारय समास ( Karmadharaya Samas ) –

कर्मधारय समास इस समास को समानाधिकरण तत्पुरुष समास भी कहा जाता है। 
यह समास तत्पुरुष समास का ही एक भेद है।                                                                                             
इस समास का उतर पद प्रधान होता है ,किन्तु प्रथम पद द्वितीय पद की विशेषता बतलाने वाला होता है अर्थात प्रथम पद ‘विशेषण या उपमान ‘ तथा उतर पद ‘विशेष्य या उपमेय ‘ के रूप में प्रयुक्त होता है।

उपमेय – वह वस्तु या व्यक्ति जिसको उपमा दी जा रही है। 
उपमान – वह वस्तु या व्यक्ति जिसकी उपमा दी जा रही है।  
उदाहरण: –
पीताम्बर ( पीत है जो अम्बर )
पीत – उपमान 
अम्बर – उपमेय 

कर्मधारय समास के उदाहरण | Karmadharaya Samas Ke Udaharan

  • महाराजा = महान है जो राजा
  • अधमरा = जो आधा मरा हुआ है
  • श्यामसुन्दर = श्याम जो सुन्दर है
  • अन्धविश्वास = अन्धा विश्वास
  • चरणकमल = कमल के समान चरण
  • मुखारविन्द = अरविन्द के समान है जो मुख
  • नृसिंह = सिंह के समान है जो नर
  • घनश्याम = घन के समान है जो श्याम
  • उषानगरी = उषा रूपी नगरी

कर्मधारय समास को दो भागो में बाँटा गया है –
(I) विशेषता वाचक कर्मधारय समास
(II) उपमान वाचक कर्मधारय समास  

(I) विशेषता वाचक कर्मधारय समास – यह विशेषण विशेष्य भाव को सूचित करता है। 

इसके कुछ उपभेद निम्न है –
i. विशेषण पूर्व पद
ii. विशेषणोतर पद
iii. विशेषणोभय पद
iv. विशेष्य पूर्व पद
v. अव्यय पूर्व पद
vi. संख्या पूर्व पद
vii. मध्यम पद लोपी

i. विशेषण पूर्व पद – इसमें प्रथम पद विशेषण होता है। 

जैसे –

✦ महाजन – महान है जो जन
✦ परमानन्द – परम है जो आनंद
✦ सद्गुण – सत है जो गुण
✦ नीलकमल – नीला है जो कमल
✦ बदबू – बद( बुरा ) है जो बू
✦ शुक्लपक्ष – शुक्ल  है जो पक्ष
✦ अरुणाभ – अरुण है जो आभा
✦ नीलगाय – नीली है जो गाय
✦ शुभागमन – सुबह है जो आगमन 
✦ खुशबू – खुश है जो बू (गंध ) 
✦ कालापानी –  काला है जो पानी 
छुटभैया –  छोटा है जो भैया 
✦ कालीमिर्च –  काली है जो मिर्च 
✦ जवांमर्द – जवान है जो मर्द
✦ परमात्मा – परम है जो आत्मा 
✦ पुच्छलतारा – पूंछ है जिस तारे के 
खड़ी बोली – खड़ी है जो बोली 
✦ मझधार – मझ( बीच) में है जो धार 
✦ तलघर – तल में है जो घर 
✦ सुंदरलाल – सुंदर है जो लाल 
✦ बड़ाघर – बड़ा है जो घर 
✦ नीलोत्पल – नीला है जो उत्पल ( कमल ) 
✦ श्वेताम्बर – श्वेत है जो वस्त्र 
✦ राजीव नयन – राजीव (कमल) के समान है जो नेत्र 
✦ महादेव – महान है जो देव 
✦ मीनाक्षी – मीन(मछली ) के समान नेत्रों वाली 
✦ नीलकंठ – नीला है जो कंठ 
✦ श्यामघन – काला है जो घन(बादल) 
✦ महाकाव्य – महान है जो काव्य 
✦ कृष्ण सर्प –  कृष्ण है सर्प जो 
✦ भ्रष्टाचार – भ्रष्ट है जिसका आचार 
✦ अंधभक्ति – अंध है जो भक्ति 
✦ अंधश्रद्धा – अंध है जो श्रद्धा 
✦ महोत्सव – महान है जो उत्सव 
✦ शिष्टाचार – शिष्ट है जिसका आचार 
✦ अल्पसंख्यक – अल्प है संख्या जो 
✦ अल्पाहार – अल्प  है आहार जो 
✦ अल्पावधि – अल्प है अवधि जो 
✦ अल्पजीवी – अल्प है जीव जो 
✦ दीर्घावधि – दीर्घ है अवधि जो 
✦ दीर्घजीवी – दीर्घ है जीवन जो 

ii. विशेषणोतर पद  – इसमें दूसरा पद विशेषण होता है। 

जैसे –

✦ जन्मान्तर – जन्म है अन्य जो 
✦ पुरुषोत्तम – पुरुषों में है उत्तम जो 
✦ प्रभुदयाल – प्रभु है दयालु जो 
✦ मुनिवर – मुनियो में है श्रेष्ठ जो 
✦ रामदीन – राम है दीन जो / दीनो का राजा है जो 
✦ शिवदयाल – शिव है दयालु जो 
✦ नराधम – नरों में अधम है जो 
✦ शिवदीन – दीनों का है शिव जो 
✦ रामदयाल – राम है दयालु जो 
✦ रामकृपाल  – कृपालु है जो राम 

iii. विशेषणोभय पद – इसमें दोनों ही पद विशेषण होते है। 

जैसे –

✦ ऊँच नीच – ऊँचा है जो नीचा है 
✦ मोटा – ताज़ा – जो मोटा है ताज़ा है 
✦ बड़ा – छोटा – जो बड़ा है जो छोटा है 
✦ पीला जर्द – पीला है जो जर्द (पीला ) है 
✦ भला बुरा – जो भला है जो बुरा है 
✦ श्यामसुन्दर – जो श्याम है जो सुंदर है 
✦ उन्नातावनत – जो उन्नत है जो अवनत है
✦ देवर्षि – जो देव है जो ऋषि है 
✦ खट्टा मीठा – जो खट्टा है जो मीठा है 
✦ शुद्धाशुद्ध – शुद्ध है जो अशुद्ध है जो 
✦ कलस्याह – जो काला है जो स्याह है 
✦ मृदुमन्द – जो मृदु है जो मंद है 
✦ सफेदझक्क – सफ़ेद है झक्क जो / अत्यधिक सफेद 
✦ लालचट्ट – अत्यंत लाल 
✦ गोरागट्ट – अत्यंत गोरा 
✦ नील लोहित – नीला है जो , लाल है जो 

iv. विशेष्य पूर्व पद – 

जैसे –

✦ धर्मबुद्धि – धर्म है यह बुद्धि
✦ विंध्य पर्वत – विंध्य नामक पर्वत 

v. अव्यय पूर्व पद –

जैसे – 

✦ अधमरा – आधा है जो मरा हुआ
✦ दुकाल – बुरा है जो काल
✦ सुयोग – अच्छा है जो योग
✦ निराशा – आशा से रहित
✦ कुवेश  – बुरा है जो वे
✦ दुर्वचन – बुरे वचन 

vi. संख्या पूर्व पद – इसमें पहला पद संख्या वाचक होता है। 

जैसे – 

✦ नवरात्र – नौ रात्रियो का है जो समूह 
✦ त्रिकाल – तीन कालो का है जो समूह 

vii. मध्यम पद लोपी –  पूर्वपद तथा उत्तरपद में सम्बन्ध बताने वाले पद का लोप हो जाता है। 

जैसे –

दही बड़ा – दही में डूबा हुआ बड़ा 
✦ वायुयान – वायु  में चलने वाला यान
✦ जलपोत – जल में चलने वाला पोत 
✦ पनडुब्बी – पानी में डूब कर चलने वाला पोत   
✦ जलकुम्भी – जल में उत्त्पन होने वाली कुम्भी 
✦ शकरपारा – शक्कर से बना पारा 
✦ पर्णशाला – पर्ण से निर्मित शाला 
✦ बैलगाड़ी – बैल से चलने वाली गाड़ी 
✦ कन्यादान – कन्या का दान 
✦ तुलादान – तराजू में तोलकर बराबर मात्रा में दिया जाने वाला दान 
✦ गीदड़ भभकी – गीदड़ जैसी भभकी 
✦ रेलगाड़ी – रेल पर चलने वाली गाड़ी 
✦ रसगुल्ला –  रस में डूबा हुआ गुल्ला 
✦ गोबर गणेश – गोबर का बना गणेश 
✦ तिल चावला – तिल मिश्रित चावल 
✦ गुड़धानी – गुड़ में मिली हुई धानी
✦ गुडंबा – गुड़ में उबाला अम्ब (आम ) 
छायातरू – छाया प्रधान तरु 
✦ घृतान्न – घृत मिश्रित अन्न

(II) उपमानवाचक कर्मधारय समास –  इस समास में एक पद उपमान तथा दूसरा पद उपमेय होता है। 

उपमापूर्व पद – इसमें प्रथम पद उपमान तथा दूसरा पद उपमेय होता है।  सामान्यतः उपमान के बाद ‘के समान ‘ शब्द लगाकर तुलना की जाती है। 

जैसे –

✦ कमलनयन – कमल के समान नयन 
✦ कमलाक्ष – कमल के समान अक्षि ( आँखे ) 
✦ चन्द्रबदन – चंद्र के समान बदन 
✦ चंद्रमुखी – चंद्र के समान मुखवाली 
✦ राजीवलोचन – राजीव के समान लोचन 
✦ वज्रदेह – वज्र के समान है देह जो 
✦ मृगनयनी – मृग के समान नयनों वाली 
✦ अरविन्दलोचन – अरविन्द (कमल ) के समान है लोचन जो 
✦ प्राणप्रिय – प्राणों के समान है प्रिय जो 
✦ लौहपुरुष – लौह के समान है पुरुष जो 
✦ भीष्मवत  – भीष्म के समान है जो
✦ सूर्यमुखी – सूर्य के समान मुख वाली 
✦ हंसगामिनी – हंस के समान चलने वाली 
✦ पाषाणहृदय – पाषाण के समान है ह्रदय जो 
✦ चन्द्रमुख – चंद्र के समान है मुख जो 
✦ लौहपुरूष – लोहे के समान है पुरुष जो 

उपमानोतर पद – इसमें प्रथम पद उपमेय तथा उत्तर पद उपमान होता है इसे रूपक कर्मधारय भी कहते है। इनमें ‘रूपी ‘ योजक शब्द का प्रयोग किया जाता है। 

जैसे –

✦ पदपंकज – पंकज रूपी पद 
✦ चरणसरोज – सरोज रूपी चरण 
✦ मुखारविंद – अरविन्द रूपी मुख 
✦ नेत्र कमल – कमल रूपी नेत्र 
✦ राजर्षि  – ऋषि रूपी राजा 
✦ वचनामृत – अमृत रूपी वचन
✦ देहलता – लता रूपी देह 
✦ मुख शशि – शशि रूपी मुख
✦ नरसिंह –  सिंह रूपी नर 
✦ कीर्तिलता – लता रूपी कीर्ति 
✦ विद्याधन –  धन रूपी विधा 
✦ वदन सुधाकर – सुधाकर रूपी वदन 
✦भुजदंड – दंड रूपी भुजा 
✦ अधर पल्ल्व – पल्ल्व रूपी अधर 
✦ ग्रन्थ रत्न – रत्न रूपी ग्रन्थ 
✦ देवर्षि – ऋषि रूपी देव 
✦ चरणकमल – कमल रूपी चरण 
✦ मुखकमल – कमल रूपी मुख 
✦ स्त्रीरत्न – स्त्री रूपी रतन 
✦ मुखचन्द्र – चन्द्रमा रूपी मुख 
✦ भवसागर – सागर रूपी संसार   
✦ विरह सागर – सागर रूपी विरह 
✦ कीर्तिलता – लता रूपी कीर्ति

कर्मधारय समास के उदाहरण | Karmadharaya Samas Ke Udaharan

विशेषण विशेष्य
पुरुषोत्तम पुरुषों में है जो उत्तम
श्वेतांबर श्वेत है जो अंबर (वस्त्र)
परमानंद परम है जो आनंद
सदधर्म सधर्म सत् है जो धर्म
भलामानस भला है जो मानस
नीलगगन नीला है जो गगन
लालटोपी लाल है जो टोपी
अंधकूप अंधा है जो कूप
महाविद्यालय महान है जो विद्यालय
लालछड़ी लाल है जो छड़ी
अधपका आधा है जो पका
नीलांबर नीला है जो अंबर
महाराज महान है जो राजा
सज्जन सत है जो जन
पीतांबर पीत है जो अंबर
कृष्णसर्प कृष्ण है जो सर्प
महावीर महान है जो वीर
महात्मा महान है जो आत्मा
ङ्केमहापुरुष महान है जो पुरुष
दुरात्मा दुर् (बुरी) है जो आत्मा
प्रधानाध्यापक प्रधान है जो अध्यापक
कुबुद्धि कु (बुरी) है जो बुद्धि
कापुरुष कायर है जो पुरुष
(कर्मधारय समास) Karmadharaya Samas
समास के अन्य भेद –

1. अव्ययी भाव समास 
2. तत्पुरुष समास
3. द्विगु समास 
4. द्वंद्व समास 
5. बहुब्रीहि समास

दोस्तो हमने इस आर्टिकल में Karmadharaya Samas in Hindi के साथ – साथ Karmadharaya Samas kise kahate hain, Karmadharaya Samas ki Paribhasha, Karmadharaya Samas ke bhed के बारे में पढ़ा। हमे उम्मीद है आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। आपको यहां Hindi Grammar के सभी टॉपिक उपलब्ध करवाए गए। जिनको पढ़कर आप हिंदी में अच्छी पकड़ बना सकते है।

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